{रू0} Triple Talaq Victim Sukhad Yojana Kya Hai – 3 तलाक पीडि़तों को 6000 रूपये

सुखद योजना 2020 – A Scheme for Triple Talaq Victim (Muslim Womens) : उत्‍तर प्रदेश के मु‍ख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने 3 तलाक पीडि़त मुस्लिम महिलाओं के लिये Triple Talaq Victim Sukhad Yojana लागू करने की बड़ी घोषणा की है।

इस योजना के लागू होने के बाद मुस्लिम समाज की Triple Talaq Victim महिलाओं को हर साल 6000 रूपये दिये जाएंगें।

इसके अलावा इस योजना के तहत हिंदू परित्‍यक्‍त महिलायें (जिन्‍हें उनके पति के द्धारा बिना तलाक दिये छोड़ दिया गया हो) को भी इस योजना का लाभ दिया जाएगा।

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि इस साल संसद में 3 तलाक के खिलाफ एक बिल केंद्रीय सरकार के द्धारा पारित कराया गया है।

जिसके कारण अब Triple Talaq को असंवैधानिक और दंडनीय अपराध की श्रेंणी में डाला जाता है।

Triple Talaq Victim Sukhad Yojana 2020 के लाभ

Triple Talaq Victim Scheme in UP in Hindi

(1) यूपी की इस नई योजना के तहत 3 तलाक पीडि़त महिलाओं को हर साल 6000 रूपये की धनराशि प्राप्‍त होगी।

(2) मुस्लिम तलाक पीडि़त महिलाओं के लिये लांच की जाने वाली इस योजना का लाभ हिंदू परित्‍यक्‍त महिलाओं को भी मिलेगा।

(3) मुस्लिम समाज की Triple Talaq Victim सभी गरीब महिलायें इस योजना के लिये सीधे तौर पर पात्र मानी जाएंगीं।

(4) 3 तलाक पीडि़त महिलाओं का मुकदमा सरकार की ओर से निशुल्‍क लड़ा जाएगा।

(5) Sukhad Yojana के तहत जिन महिलाओं के पास आवास नहीं है, उन्‍हें प्रधानमंत्री आवास अथवा मुख्‍यमंत्री आवास से घर दिया जाएगा।

(6) इस योजना के तहत सभी Triple Talaq Victim को आयुष्‍मान योजना अथवा मुख्‍यमंत्री आरोग्‍य योजना से Health Insurance का लाभ भी मिलेगा।

Triple Talaq Victim Sukhad Yojana 2020 क्‍यों लागू की गयी है? ट्रिपल तलाक क्‍या है?

What is Triple Talaq in Hindi : मुस्लिम समाज में सदियों से 3 तलाक की प्रथा चली आ रही है। Triple Talaq की इस प्रथा को शरीयत के हिसाब से सही माना जाता है।

मुस्लिम धर्म गुरूओं के अनुसार इस्‍लाम धर्म में तलाक को बहुत ही गलत माना जाता है। इसीलिये इस्‍लाम धर्म में 3 तलाक तथा उसके बाद हलाला जैसी प्रथा को समाज के लिये अनिवार्य नियमों के रूप में लागू किया गया था।

असल में जिस समय इस्‍लाम धर्म का जन्‍म हुआ। उस समय मक्‍का समेत पूरी दुनिया में तमाम सामाजिक कुरीतियां तथा बीमारियां व्‍याप्‍त थीं। बेटियों के पैदा होते ही उन्‍हें जमीन में जिंदा दफन कर दिया जाता है।

उस जमाने में आज के समय के अनुरूप स्‍वलिखित सवैंधानिक और विकसित सामाजिक राष्‍ट्रों का भी घोर आभाव था।

इस्‍लाम धर्म के अनुसार मुस्लिमों के लिये जिन सामाजिक नियमों की संरचना की गयी, उसके पीछे ईश्‍वरीय संदेशों की भी अहम रोल है।

यही कारण है कि इस्‍लाम धर्म में एकल अथवा 2 तलाक को महत्‍व नहीं दिया जाता है। एक तलाक देने के बाद अथवा 2 तलाक देने के बाद भी तलाक की प्रक्रिया पूर्णं नहीं मानी जाती है।

यदि मुस्लिम पति 1 अ‍थवा 2 तलाक देने के बाद अपनी गलती महसूस करता है, तो उसे तीसरा तलाक देने से पहले पुन: सोच विचार करने का मौका भी हासिल होता है।

इस अवधि में वह अपनी गलती सुधार कर दी गयी तलाक को वापस ले सकता है। लेकिन 3 बार तलाक बोलने पर तलाक हो जाता है।

लेकिन वर्तमान में मुस्लिम समाज में ट्रिपल तलाक पीडि़त महिलाओं की संख्‍या में तेजी से इजाफा हुआ है। जिसकी वजह से सरकार ने ट्रिपल तलाक पर बैन लगा दिया है और अब पीडि़त महिलाओं के पुर्नवास तथा कल्‍याण के लिये सुखद योजना जैसी अन्‍य योजनायें भी बनाई जा रही हैं।

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Triple Talaq Victim को हलाला प्रथा का पालन क्‍यों करना पड़ता है?

इस्‍लॉमिक शरियत के अनुसार यदि कोई मुस्लिम पति अपनी पत्‍नी को 3 तलाक दे देता है। तथा 3 तलाक देने के बाद जब से पछतावा होता है और वह पुन: अपनी पूर्व पत्‍नी को अपनाना चाहता है।

तो वह अपनी पूर्व पत्‍नी को उसी दशा में अपने घर में ला सकता है। जब उसकी पूर्व पत्‍नी हलाला प्रक्रिया से गुजर चुकी हो।

असल में हलाला की प्रथा महिलाओं के ऊपर दंड स्‍वरूप नहीं थोपी गयी है। बल्कि यह दंड उस पति के लिये है, जिसने अपनी निर्दोश पत्‍नी को Triple Talaq दिया।

हलाला क्‍या है?

What is Halala in Hindi : हलाला वह प्रक्रिया है। जिसमें महिला को तलाक दे दिया जाता है। पर उसका पूर्व पति अपनी गलती स्‍वीकार करते हुए पुन: अपने घर वापस लाना चाहता है।

ऐसी स्थिति में महिला का निकाह किसी दूसरे व्‍यक्ति से कराया जाता है और फिर शादी की सभी रस्‍में निभाने के बाद उसे पुन: तलाक दिलवाया जाता है।

इसके बाद ही अपनी पूर्व पत्‍नी को पति घर ला सकता है। इस स्थिति में पति को अपनी पत्‍नी से एक बार फिर निकाह (शादी) करनी पड़ती है।

लेकिन यदि पूर्व पति अपनी पत्‍नी को पुन: अपने घर नहीं लाना चाहता एवं किसी और महिला से शादी कर लेता है।

तो पूर्व पत्‍नी को हलाला की प्रथा से नहीं गुजरना पड़ता है। वह चाहे तो किसी अन्‍य युवक से शादी कर लेती है। कहने का अर्थ यह है कि हलाला प्रथा सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम पतियों के लिये ही सजा के तौर पर लागू की गयी थी। इसका महिलाओं के शोषण से कुछ लेना देना नहीं है।

जो मुस्लिम महिला हलाला की प्रथा से गुजरना नहीं चाहती है, वह अपनी मर्जी से अपने पूर्व पति के पास जाने और उससे पुन: शादी करने से इंकार कर सकती है।

तीन तलाक पीडि़त महिलाओं के लिये Sukhad Yojana कब लागू होगी

Triple Talaq Victim महिलाओं के लिये Sukhad Yojana की घोषणा 25 सितंबर 2019 को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्‍ठान में 3 तलाक पीडि़त महिलाओं से संवाद कार्यक्रम में की।

उन्‍होंने इस कार्यक्रम में कहा कि यूपी सरकार 3 तलाक पीडि़त महिलाओं के कल्‍याण के लिये तेजी से काम कर रही है।

हम जल्‍दी ही ऐसी व्‍यवस्‍था करने जा रहे हैं, जिससे 3 तलाक का मुकदमा महिलायें निशुल्‍क लड़ सकेंगीं। इसके अलावा उन्‍होंनें अमरोहा की नेटबॉल खिलाड़ी व Triple Talaq Victim सुमायला जावेद को सरकारी नौकरी देने की भी घोषणा की।

मुख्‍यमंत्री योगी ने कहा कि Triple Talaq Victim Sukhad Yojana 2020 से जुड़ी हुईं सारी औपचारिकतायें पूरी कर ली जाएंगीं और इस योजना को प्रभावी रूप से पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।

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