Narva Garwa Ghurwa Bari Yojana Kya Hai – नरवा गरवा घरवा बाड़ी योजना छत्तीसगढ़

Narva Garwa Ghurwa Bari Yojana Details in Hindi : प्‍यारे दोस्‍तों, आज हम छत्‍तीसगढ़ राज्‍य की एक ऐसी योजना के बारे में बात करने जा रहे हैं, जिसने लागू होते ही पूरे देश का ध्‍यान अपनी ओर खींचा है। छत्‍तीसगढ़ की इस योजना का नाम नरवा गरवा घरवा बाड़ी योजना 2022 है।

Narva Garwa Ghurwa Bari Yojana छत्‍तीसगढ़ के मुख्‍यमंत्री भूपेश बघेल की सबसे महत्‍वाकांक्षी योजना है। चूंकि यह योजना मुख्‍यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्‍ट भी है, इसलिये राज्‍य के प्रशासनिक स्‍तर पर इस योजना को लेकर बहुत गंभीरता बरती जा रही है।

नरवा गरवा घरवा बाड़ी योजना के लांच होने के बाद से राज्‍य में रोजगार के मौके ग्रामीण स्‍तर पर ही मिलना शुरू हो गये हैं। यह योजना छत्‍तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था पर बहुत ही सकारात्‍मक प्रभाव डाल रही है।

छत्‍तीसगढ़ की इस योजना की तारीफ स्‍वयं प्रधानमंत्री मोदी भी मुख्‍यमंत्रियों की बैठक के दौरान कर चुके हैं। इसलिये माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस प्रकार की योजना कुछ अन्‍य राज्‍यों में भी तथा राष्‍ट्रीय स्‍तर पर भी देखने को मिल सकती है।

Chhattisgrah Narva Garwa Ghurwa Bari Yojana Kya Hai : नरवा गुरूवा घुरूवा बाड़ी योजना क्‍या है?

Chhattisgrah Narva Garwa Ghurwa Bari Yojana छत्तीसगढ़ के 4 प्रतीकों से प्रेरित है। यह चिन्ह हैं नरवा (नाला), गरवा (पशु तथा गौठान), घुरवा (खाद यानि उर्वरक) बाड़ी (बाग) आदि हैं।
फोटो साभार – भूपेश बघेल टिवटर

What is Narva Garwa Ghurwa Bari Yojana in Hindi : नरवा गुरूवा घुरूवा बाड़ी योजना देश के छत्‍तीसगढ़ राज्‍य में चलाई जा रही सबसे बड़ी योजनाओं में से एक है।

हाल ही में नीति आयोग की बैठक में छत्‍तीसगढ़ की इस योजना की चर्चा हुई थी। जिसके बाद नीति आयोग तथा पीएम मोदी ने इस योजना की खुले दिल से तारीफ भी की थी।

असल में यह योजना छत्‍तीसगढ़ के 4 प्रतीकों से प्रेरित है। यह चिन्‍ह हैं नरवा (नाला), गरवा (पशु तथा गौठान), घुरवा (खाद यानि उर्वरक) बाड़ी (बाग)

नयी योजना के तहत राज्‍य में इन चारों चीजों के सरंक्षण पर बल दिया जा रहा है। राज्‍य में नरवा गुरूवा घुरूवा बाड़ी योजना लागू होने के बाद भूजल के रिचार्ज मे बढ़ोत्‍तरी, सिंचाई के लिये जल की पर्याप्‍त मात्रा में उपलब्‍धता, आर्गेनिक खेती के लिये पर्याप्‍त मात्रा में खाद तथा पशुओं की देखभाल व उनके लिये पर्याप्‍त चारे की व्‍यवस्‍था हो सकेगी।

Narva Garwa Ghurwa Bari का हिंदी में अर्थ क्‍या है?

जिन 4 शब्‍दों को मिला कर इस योजना का नामकरण हुआ उनके बारे में विस्‍तार से जानना हम सबके लिये बहुत जरूरी है।

नरवा क्‍या है?

छत्‍तीसगढ़ में नालों को नरवा कहा जाता है। इस योजना के तहत राज्‍य के नालों पर चेकडेम बना कर पानी रोकना तथा उस पानी को खेतों की सिंचाई के लिये उपलब्‍ध कराना है। इसके अलावा नालों के जरिये बरसात का जो पानी बह जाता है, उसे रोक कर भूगर्भीय जल को रिचार्ज करना है।

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गरवा क्‍या है?

किसी भी गांव में मौजूद पशु धन को गरवा कहा जाता है। नरवा गरवा घरवा तथा बाड़ी योजना के तहत गांवों में पशुओं के लिये Day Care Center बनाये जा रहे हैं। जिनमें पशुओं की देखभाल की जाती है।

घुरवा क्‍या है?

छत्‍तीसगढ़ी भाषा में घुरवा का मतलब गडढा होता है। पशुओं के Day Care Center में पशुओं का जितना भी गोबर जमा होता है, वह घुरवा में डाला जाता है। जिसमें उच्‍च कोटि की खाद बनती है। जो खेतों में डालने के लिये किसानों को बेंच दी जाती है।

बाड़ी क्‍या है?

बाड़ी का मतलब बगीचा होता है। यह बगीचा योजना के लाभार्थी के घर से सटा हुआ होता है। जिसमें उच्‍चकोटि के पोषण के लिये फल तथा सब्जियां इत्‍यादि उगाई जाती हैं।

Narva Garwa Ghurwa Bari Yojana की गाइडलाइन के अनुसार कुछ जरूरी नियम

  • इस योजना का संचालन पूरे छत्‍तीसगढ़ के सभी जिलों की ग्राम पंचायतों में चरणबद्ध तरीके से होगा।
  • प्रत्‍येक गांव में पशु धन का बेसलाइन सर्वे किया जाएगा।
  • सर्वे के बाद प्रति 100 गौधन अथवा पशु धन के लिये 1 एकड़ जमीन चिन्हित करके उस पर गौठान का निर्मांण कराया जाएगा।
  • प्रति 100 गौधन के हिसाब से गौठान का आकार बढ़ाया जाएगा। मसलन यदि किसी गांव में 300 मवेशी हैं तो वहां गौठान का निर्मांण 3 एकड़ में होगा।
  • जिस स्‍थान पर गौठान बनाया जाएगा, वहां पशुओं को पीने के लिये पानी के स्रोत मौजूद होने चाहिये। ताकि पशुओं को आते जाते समय पीने का पानी उपलब्‍ध हो सके।
  • योजना के तहत बनने वाले गौठानों का निर्मांण ऊंचाई वाले स्‍थानों पर ही किया जाएगा। ताकि जलभराव न हो और पशुओं के चलने फिरने से कच्‍ची भूमि में कीचड़ न हो सके।
  • गौठान के अंदर ही घरवा बनया जाएगा ताकि वहां उच्‍चकोटि की खाद का निर्मांण होता रहे।
  • राज्‍य के सभी गौठानों की देखरेख का जिम्‍मा ग्राम गौठान समिति करेगी।
  • योजना के तहत बनने वाले गौठानों के चारों और बांस बल्लियों की सहायता से बाड़ बनाई जाएगी।
  • गौठान के अंदर फलदार, छाया दार तथा ऐसे पत्‍तीदार पेड़ भी लगाये जाएंगें, जिन्‍हें पशु चाव से खाते हों।
  • Narva Garwa Ghurwa Bari Yojana के तहत गौठानों में गोबर गैस प्‍लांट भी लगाये जाएंगें ताकि इन प्‍लांटों में बनने वाली गैस को सामुदायिक गैस इकाई से जोड़ा जा सके।
  • गौठानों के नजदीक चारागाह विकसित किये जाएंगें, ताकि पशुओं को हरा चारा पर्याप्‍त मात्रा में मिलता रहे।
  • गौठानों में ग्रामीणों के लिये चौपाल भी बनाई जाएगी।
  • प्रत्‍येक गौठान में कृत्रिम गर्भाधान, बधिया करण तथा टीका करण आदि की सुविधायें भी पशुओं के लिये उपलब्‍ध होंगी।
  • इस योजना के तहत बनने वाली कम्‍पोस्‍ट तथा वर्मी कम्‍पोस्‍ट खाद को गांव के ही किसानों को कुछ मूल्‍य अदा करने के बाद उपलब्‍ध कराया जाएगा।

नरवा गरवा घरवा बाड़ी योजना के तहत बनने वाले गौठान का लाभ

  • प्रत्‍येक गांव में बनने वाले गौठान में ग्रमीणों के पालतू पशुओं के साथ साथ आवारा पशुओं को गौठानों में लाया जाएगा। दिन के समय अधिकांश पशु गौठानों में ही रहेंगें, जिससे पशुओं के द्धारा खेतों में फसल चरने की समस्‍या से किसानों को छुटकारा मिल जाएगा।
  • गौठानों में कृत्रिम गर्भाधान के जरिये अच्‍छी नस्‍ल के सांढ़ों का सीमेन उपलब्‍ध कराया जाएगा। जिससे पशुओं की नस्‍ल में सुधार होगा तथा दुधारू पशुओं की संख्‍या बढ़ेगी।
  • गौठानों में अधिक मात्रा में कम्‍पोस्‍ट खाद का निर्मांण होगा। जिससे प्राकृतिक खाद की उपलब्‍धता बढ़ेगी त‍था भूमि की उर्वरक क्षमता में भी बढ़ोत्‍तरी दर्ज की जा सकेगी।
  • गौठानों में फल दार वृक्ष लगाये जाने से ग्रामीण बाजार मे फलों की उपलब्‍धता पर्याप्‍त मात्रा में रहेगी।

नरवा गुरूवा घुरूवा बाड़ी योजना के तहत वर्मी कम्‍पोस्‍ट खाद कैसे बनेगी

प्रत्‍येक ग्राम में Narva Garwa Ghurwa Bari Yojana के तहत 10-20 लोगों को रोजगार दिया जाएगा। गौठानों में वर्मी कम्‍पोस्‍ट खाद के उत्‍पादन के लिये वर्मी किट प्रदान की जाएगी। जिसके जरिये वहां वर्मी कम्‍पोस्‍ट खाद बनाई जा सकेगी।

Narva Garwa Ghurwa Baadi के तहत पेड़ लगाने तथा उनके संरक्षण पर मिलेगा पैसा

जो लोग इस योजना के तहत रोजगार पायेंगें, उन्‍हें पेड़ लगाने तथा उनकों सरंक्षित रखने के एवज में कुछ पैसा सरकार की ओर से दिया जाएगा। जिससे ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार देखने को मिलेगा।

नरवा गरवा घरवा बाड़ी योजना की विशेषतायें एक नजर में जानें

  • जिन गांवों में इस योजना का संचालन होगा, उन गांवों में दूध का उत्‍पादन बढ़ जाएगा। जिससे गांव में समृद्धि आएगी।
  • गौठान के अतिरिक्‍त चारागाहों के लिये गौठान के नजदीक ही 5 से 10 एकड़ भूमि आ‍रक्षित कर ली जाएगी। जिससे पशुओं को सरकारी सहायता से बनने वाले विशाल चारागाह चरने के लिये मिल सकेंगें।
  • आवारा पशुओं को शरणस्‍थली मिल सकेगी। अभी पशु विशेष कर गायें तथा सांढ़ एक गंभीर समस्‍या बन चुके हैं। यह खेतों में लगी फसल को चरने के साथ साथ रौंद डालते हैं तथा ग्रामीणों पर हमला कर गंभीर रूप से घायल भी कर देते हैं। लेकिन गौठानों में रखे जाने से पशुओं को आश्रय मिलेगा तथा भोजन पानी भी पर्याप्‍त मात्रा में मिलता रहेगा।

तो दोस्‍तों यह थी हमारी आज की पोस्‍ट Chhattisgrah Narva Garwa Ghurwa Bari Yojana Kya Hai यदि आप Gothan Yojana pdf Download के संदर्भ में कुछ और जानकारी पाना चाहते हैं, तो आप हमसें कमेंट बॉक्‍स के जरिये पूछ सकते हैं।

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7 thoughts on “Narva Garwa Ghurwa Bari Yojana Kya Hai – नरवा गरवा घरवा बाड़ी योजना छत्तीसगढ़”

  1. छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वपूर्ण योजना आज आदिवासियों, गरीब ग्रामीणों, अभावग्रस्त लोगो के जीवन स्तर ऊपर उठाने के लिये लाभकारी सावित हो रही है। आपके समाचार के प्रकाशन के बाद और अधिक जानकारी लोगों तक पहुंचेगी। जिससे ज्यादा लोग फायदा उठा सकेंगे।

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  2. Such me ye ek mahtva puren yojna hia esse gavo ke logo economy status he balki unko javik kheti karne ke leye protshan be milega. Is yojna ke tahat na serf ache forming hoge balki bhumi ke uravara sakti be bane rahege.

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    • आपने सही कहा, गांवों के विकास के लिये नरवा गरवा घुरूवा बाड़ी योजना देश के इतिहास में मील का पत्‍थर साबित होने वाली है।

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  3. Very nice as well as unique project. Other state governments will attract and implement definitely in their states for rural development in particular

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  4. योजना बनाने से केवल मतलब नही है किसीभी योजना को सही तरीके से लागू करना,एक योजनाबध नीति को किसी सिगमेनट में परिवर्रतन करना ,योजना को असफल करना,आज 100 गाय के पीछे 1एकड़ का प्रावधान किया गया है लेकिन उसमें सबजी का उत्तपादन किया जा रहा है तो गाय को कहां रखा जायेगा और घांस कहां उगाया जायेगा और पानी की वयवस्था कहां होगी।गडडे की भी उसी जमीन में खोदना है,गाय बैल को कहां रखा जायेगा,इसलिये राशि का दुरुपयोग होना है
    और योजना की असफलता का कारण
    भी।

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